कौआकोल पीएचसी में लिपिक के खिलाफ स्वास्थ्यकर्मियों का मोर्चा, कार्यालय घेरकर किया प्रदर्शन

रिश्वत मांगने और मनमानी का आरोप, कर्मियों ने तत्काल स्थानांतरण समेत कई मांगें रखीं, लिपिक ने आरोपों को बताया राजनीतिक साजिश
Report by Nawada News Xpress/ नवादा / सूरज कुमार
नवादा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) कौआकोल में शुक्रवार को स्वास्थ्यकर्मियों का आक्रोश खुलकर सामने आया। विभिन्न समस्याओं और कार्यालयी कार्यप्रणाली को लेकर कर्मियों ने पीएचसी कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पीएचसी में लंबे समय से कार्यरत लिपिक कौशल किशोर पर मनमानी करने और विभिन्न कार्यों के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए तत्काल स्थानांतरण की मांग की।

स्वास्थ्यकर्मियों का आरोप है कि कार्यालय स्तर पर उन्हें कथित तौर पर अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है। बिना पूर्व सूचना के वेतन कटौती और स्पष्टीकरण की कार्रवाई किए जाने की बात भी कर्मियों ने कही। इस संबंध में कर्मचारियों ने अपनी मांगों से संबंधित पत्र अधिकारियों को सौंपकर शीघ्र समाधान की मांग की।

कर्मियों की प्रमुख मांगों में लिपिक का तत्काल स्थानांतरण, बिना सूचना वेतन कटौती पर रोक तथा अनुपस्थिति की स्थिति में नियमानुसार अवकाश में समायोजन शामिल है। साथ ही मौखिक रूप से डराने-धमकाने और प्रताड़ित करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई। कर्मियों ने सभी कर्मचारियों को सेवा पुस्तिका एवं लेजर की छायाप्रति उपलब्ध कराने, कार्यालयी पत्र कम से कम 24 घंटे पूर्व जारी करने और आधिकारिक ई-मेल सार्वजनिक करने की मांग भी रखी।

इसके अलावा उपस्थिति पंजी की व्यवस्था में सुधार, पे-लेवल के अनुसार नाम दर्ज करने, इमरजेंसी वार्ड में महिला शौचालय एवं पेयजल की व्यवस्था तथा फील्ड स्टाफ को बायोमीट्रिक उपस्थिति की अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग की गई।

प्रदर्शन में फार्मासिस्ट विनय कुमार, जीएनएम जुली कुमारी, एएनएम अंशु कुमारी, एएनएम आशा सिन्हा समेत अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे। कर्मियों ने चेतावनी दी कि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

लिपिक ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
इधर, लिपिक कौशल किशोर ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को राजनीतिक और बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि बायोमीट्रिक हाजिरी बनाना विभागीय आदेश के तहत अनिवार्य है। उनके अनुसार ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और विलंब से आने वाले कर्मियों को परेशानी होने के कारण साजिश के तहत उन्हें बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने रिश्वत मांगने समेत लगाए गए अन्य आरोपों से भी इनकार किया है।

