नर्सरी से 12वीं तक वारिसलीगंज में पढ़ाई, फिर कोटा की तपस्या ने बदली किस्मत; बड़े भाई IIT दिल्ली से अमेरिका में PhD, एक ही परिवार के दो बेटों ने रचा प्रेरणा का नया अध्याय
Report by Nawada News Xpress/ नवादा/ सूरज कुमार

क्या कोई छोटे शहर का छात्र देशभर के लाखों प्रतिभागियों को पीछे छोड़कर मेडिकल प्रवेश परीक्षा में चौथा स्थान हासिल कर सकता है? नवादा जिले के वारिसलीगंज के आयुष भालोटिया ने इस सवाल का ऐसा जवाब दिया है, जिसकी चर्चा पूरे बिहार ही नहीं, देशभर में हो रही है। उनकी सफलता के पीछे की कहानी केवल एक रैंक की नहीं, बल्कि अनुशासन, संघर्ष, परिवार के संस्कार और बड़े सपनों की कहानी है। वारिसलीगंज के कमलिया मिल निवासी आयुष भालोटिया ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 4 हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया है। जैसे ही परिणाम सामने आया, परिवार, विद्यालय और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर बधाइयों की बाढ़ आ गई और आयुष की सफलता लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई।

आयुष, सुनील भालोटिया और किरण भालोटिया के पुत्र हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई वारिसलीगंज स्थित विवेकानंद पब्लिक स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कोटा का रुख किया। सीमित संसाधनों से निकलकर देश के सर्वश्रेष्ठ छात्रों की कतार में जगह बनाना उनकी मेहनत और आत्मविश्वास का प्रमाण माना जा रहा है।
एक ही घर से निकले दो सितारे
आयुष की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनके बड़े भाई आदित्य भालोटिया आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में पीएचडी कर रहे हैं। शिक्षा और मेहनत की यह पारिवारिक परंपरा अब पूरे इलाके के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

क्यों हो रही है इस सफलता की इतनी चर्चा?
यह केवल एक छात्र की सफलता नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है जो बताती है कि छोटे शहरों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं। वारिसलीगंज जैसे कस्बे से निकलकर देश में चौथा स्थान हासिल करना हजारों छात्रों के लिए उम्मीद की नई किरण बन गया है।
बधाइयों का तांता, हर जुबान पर आयुष का नाम
आयुष की इस उपलब्धि पर परिजनों, शिक्षकों, मित्रों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रवासियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। लोगों का कहना है कि भालोटिया परिवार ने शिक्षा, अनुशासन और मेहनत की ऐसी मिसाल पेश की है, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी प्रेरणा लेंगी।
















