20 वर्षीय विचाराधीन कैदी की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप, कक्षपाल निलंबित; ब्ब्ज्ट फुटेज और सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल
Report by Nawada News Xpress/ नवादा / सूरज कुमार

नवादा मंडल कारा में बुधवार को एक 20 वर्षीय विचाराधीन कैदी की संदिग्ध मौत ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जेल प्रशासन जहां इसे आत्महत्या का मामला बता रहा है, वहीं मृतक के परिजनों ने इसे सुनियोजित हत्या करार देते हुए उच्चस्तरीय जांच और दोषी अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। घटना के बाद पूरे जिले में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। मृतक की पहचान मेसकौर थाना क्षेत्र के महाराजगंज गांव निवासी रघु चौहान के पुत्र घनश्याम कुमार उर्फ दुलारचंद (20 वर्ष) के रूप में हुई है। वह पॉक्सो एक्ट के एक मामले में विचाराधीन कैदी के रूप में मंडल कारा में बंद था। जेल अधीक्षक बृजेश सिंह मेहता के अनुसार घनश्याम ने सीढ़ी रूम की चाबी लेकर अपने गमछे से फांसी लगा ली। उसे पहले जेल अस्पताल और फिर गंभीर हालत में नवादा सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले में प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने पर ड्यूटी पर तैनात कक्षपाल नीतीश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

लेकिन इस आधिकारिक दावे पर मृतक के परिजन गंभीर सवाल उठा रहे हैं। मृतक के पिता रघु चौहान का आरोप है कि उनके बेटे ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि जेल के अंदर उसकी हत्या की गई है। उनका कहना है कि यदि जेल में हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, तो घटना की पूरी तस्वीर सामने क्यों नहीं लाई जा रही है। उन्होंने जेल अधीक्षक समेत जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने और निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। परिजनों का आरोप है कि घटना के कई घंटे बाद तक कोई जिम्मेदार जेल अधिकारी सदर अस्पताल नहीं पहुंचा। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। दूसरी ओर, घटना की जांच के लिए मजिस्ट्रेट की तैनाती कर दी गई है, हालांकि जांच पूरी होने तक अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि नवादा मंडल कारा पहले भी विवादों में रह चुकी है। नवंबर महीने में भी एक कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी, जबकि इसी वर्ष जुलाई में पुलिस अभिरक्षा में इलाज के दौरान एक कैदी सदर अस्पताल से फरार हो गया था। दोनों मामलों में भी जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कड़ी सुरक्षा वाले मंडल कारा के भीतर एक विचाराधीन कैदी आखिर फांसी तक कैसे पहुंच गया? क्या यह सुरक्षा में बड़ी चूक है, या फिर परिजनों के आरोपों में सच्चाई छिपी है? पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और मजिस्ट्रेट जांच के बाद ही इस रहस्यमयी मौत की असली तस्वीर सामने आ सकेगी, लेकिन फिलहाल नवादा मंडल कारा एक बार फिर सवालों के कटघरे में खड़ा है।


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