श्रीराम कथा में प्रभंजनानंद जी की बड़ी सीख! रिश्तों में अहंकार नहीं, समर्पण जरूरी, जानिए जीवन को सफल बनाने के तीन सूत्र

कथा में पुष्प वाटिका, धनुष भंग और सीताराम विवाह के प्रसंगों से दिया जीवन का संदेश, बोले- रिश्तों की मजबूती का आधार प्रेम, समर्पण और मर्यादा
Report by Nawada News Xpress/ नवादा / सूरज कुमार
नवादा। जीवन में व्यक्ति की वास्तविक सुंदरता उसके पहनावे से नहीं, बल्कि उसके विचारों, मधुर वाणी, संस्कारों और श्रेष्ठ आचरण से झलकती है। मनुष्य कितना भी शक्तिशाली और सामर्थ्यवान क्यों न हो, यदि उसके जीवन में विनम्रता, मर्यादा और आत्मसंयम नहीं है, तो उसकी उपलब्धियों का कोई विशेष महत्व नहीं रह जाता।

प्रभु श्रीराम का चरित्र हमें भावनाओं पर नियंत्रण रखने, रिश्तों का सम्मान करने और कठिन परिस्थितियों में भी अपने संस्कारों पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। उक्त बातें अयोध्या से पधारे अंतरराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध कथा व्यास पूज्य डॉ. स्वामी प्रभंजनानंद शरण जी महाराज ने श्रीराम कथा के दौरान कहीं।

उन्होंने कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए सामर्थ्य के साथ आत्मविश्वास भी जरूरी है। भगवान श्रीराम द्वारा शिवजी के धनुष का भंग करना इस बात का प्रतीक है कि जब व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास, सामर्थ्य और ईश्वर की कृपा होती है, तब कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। परिस्थितियों से घबराकर लक्ष्य नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि कठिनाइयां व्यक्ति को रोकने नहीं, बल्कि उसकी क्षमता और धैर्य की परीक्षा लेने आती हैं।

महाराज श्री ने कहा कि कुछ लोग अपनी शक्ति का प्रदर्शन शब्दों से करते हैं, जबकि योग्य व्यक्ति अपने कर्मों से पहचान बनाता है। अपनी उपलब्धियों पर अहंकार करने के बजाय ऐसे श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए कि सफलता स्वयं आपकी पहचान बन जाए।

सीताराम विवाह से समझाया रिश्तों का महत्व
सीताराम विवाह प्रसंग की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों, संस्कारों और परंपराओं का संगम है। श्रीसीताराम विवाह प्रेम, समर्पण, विश्वास, त्याग और पारिवारिक मर्यादा का अनुपम आदर्श प्रस्तुत करता है। रिश्ते अधिकार जताने से नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समझने, सम्मान देने और विपरीत परिस्थितियों में साथ निभाने से मजबूत होते हैं।

उन्होंने कहा कि अच्छे रिश्तों में अहंकार नहीं, बल्कि समर्पण होना चाहिए। जहां एक-दूसरे को झुकाने की कोशिश होती है, वहां संबंध कमजोर पड़ने लगते हैं, जबकि परस्पर सम्मान और समझदारी से प्रेम मजबूत होता है। परिवार में हर बार जीतने की जिद नहीं करनी चाहिए, क्योंकि कभी-कभी रिश्तों को बचाने के लिए स्वयं झुक जाना ही सबसे बड़ी जीत होती है।

योग्यता के साथ विनम्रता और जीवन में मर्यादा जरूरी
श्रीराम कथा का जीवन संदेश देते हुए स्वामी प्रभंजनानंद शरण जी ने कहा कि जीवन में धन कमाना बड़ी बात नहीं, बल्कि धन के साथ संस्कार बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

शक्तिशाली बनना बड़ी बात नहीं, बल्कि शक्ति के साथ विनम्र बने रहना श्रेष्ठता है। इसी तरह संबंध बनाना आसान हो सकता है, लेकिन उन्हें जीवनभर प्रेम और विश्वास के साथ निभाना ही वास्तविक सफलता है।

उन्होंने पुष्प वाटिका के प्रसंग को पवित्र भावनाओं, धनुष भंग को आत्मविश्वास और सीताराम विवाह को प्रेम, समर्पण एवं मर्यादित जीवन का प्रतीक बताया। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि जीवन में इन तीनों आदर्शों को अपनाकर व्यक्ति न केवल अपने परिवार और समाज में सम्मान प्राप्त कर सकता है, बल्कि स्वयं एक आदर्श व्यक्तित्व भी बन सकता है।

