पैसा नहीं, मन की शांति और प्रभु श्रीराम पर अटूट विश्वास ही जीवन का सबसे बड़ा धन : स्वामी प्रभंजनानंद शरण

गांधी इंटर विद्यालय में श्रीराम कथा का शुभारंभ, कथा व्यास ने प्रेम, सेवा, विनम्रता और मर्यादा को बताया सुखी जीवन का आधार
Report by Nawada News Xpress/ नवादा / सूरज कुमार
नवादा। गांधी इंटर विद्यालय के प्रांगण में श्री राम कृष्ण कथा परिवार की ओर से आयोजित श्रीराम कथा के प्रथम दिन अयोध्या से पधारे अंतरराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध कथा व्यास पूज्य डॉ. स्वामी प्रभंजनानंद शरण जी महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन की वास्तविक संपत्ति का बोध कराया। उन्होंने कहा कि जीवन का सबसे बड़ा धन पैसा नहीं, बल्कि मन की शांति, हृदय की पवित्रता और प्रभु श्रीराम के चरणों में अटूट विश्वास है।

मनुष्य संसार में कितनी भी उपलब्धियां हासिल कर ले, लेकिन यदि उसके जीवन में संतोष, वाणी में मधुरता, व्यवहार में विनम्रता और हृदय में प्रभु के प्रति प्रेम नहीं है, तो उसकी सारी उपलब्धियां अधूरी हैं।

स्वामी जी ने कहा कि श्रीराम कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन को सुंदर और सार्थक बनाने का मार्ग है। यह हमें सिखाती है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। अपमान मिलने पर धैर्य, कठिनाइयों में विश्वास और सफलता मिलने पर विनम्रता बनाए रखना ही सच्चे जीवन की पहचान है।

उन्होंने कहा कि जिस हृदय में प्रभु श्रीराम का वास होता है, वहां द्वेष की जगह प्रेम, क्रोध की जगह क्षमा, अहंकार की जगह विनम्रता और निराशा की जगह आशा का संचार होने लगता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन कुछ समय प्रभु के स्मरण, सत्संग और सद्कर्मों के लिए अवश्य निकालना चाहिए।

भक्ति का वास्तविक अर्थ दूसरों के दुख को समझना
कथा व्यास ने भक्ति के वास्तविक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रभु की भक्ति का अर्थ केवल हाथ जोड़कर पूजा करना नहीं, बल्कि अपने आचरण को ऐसा बनाना है कि किसी के हृदय को ठेस न पहुंचे।

भूखे को भोजन कराना, दुखी व्यक्ति को सांत्वना देना, बड़ों का सम्मान करना और जरूरतमंदों की सहायता करना भी प्रभु की सच्ची सेवा है।

उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने भीतर के अहंकार को त्यागकर प्रेम, सेवा और मर्यादा को जीवन में अपनाता है, तभी उसका जीवन प्रभुमय होने लगता है।

श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात कर व्यक्ति न केवल अपने जीवन को बेहतर बना सकता है, बल्कि समाज में भी प्रेम, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को मजबूत कर सकता है।

