नवादा में ‘स्पीड किलर’ सड़कें: एक दिन में 3 खौफनाक हादसे, दंपत्ति समेत 3 की मौत, 5 घायल

हिसुआ-राजगीर फोरलेन पर ट्रक ने पति-पत्नी को कुचला • NH-20 पर अज्ञात वाहन ने युवक की ली जान • नेमदारगंज के पास कार हादसे में 5 लोग गंभीर

Report by Nawada News Xpress/ नवादा / सूरज कुमार

नवादा जिले में तेज रफ्तार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक ही दिन में तीन अलग-अलग भीषण सड़क हादसों ने पूरे जिले को दहला दिया। इन हादसों में दंपत्ति समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। लगातार बढ़ती दुर्घटनाओं के बावजूद प्रशासन की सुस्ती पर सवाल उठने लगे हैं।

पहली घटना हिसुआ-राजगीर फोरलेन पर हिसुआ थाना क्षेत्र के भुलन बिगहा गांव के पास हुई, जहां तेज रफ्तार अज्ञात ट्रक ने बाइक सवार पति-पत्नी को रौंद दिया। इस दर्दनाक हादसे में भोला बिगहा निवासी कृष्णदेव चौहान और उनकी पत्नी शारदा देवी की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों राजगीर से घर लौट रहे थे। घटना के बाद गांव में मातम छा गया। ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि इस खतरनाक मोड़ पर स्पीड ब्रेकर होता, तो हादसा टल सकता था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, नवंबर से अब तक इस इलाके में 40-50 दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।

दूसरी घटना नगर थाना क्षेत्र के लोहानी बिगहा के पास NH-20 पर हुई। यहां तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने बाइक में पीछे से जोरदार टक्कर मार दी, जिससे रोह थाना क्षेत्र के नावाडीह निवासी दीपक कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका दोस्त हार्दिक कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को बेहतर इलाज के लिए पावापुरी रेफर किया गया है। बताया जाता है कि दीपक बिहार शरीफ में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था। पिता गुजरात में नौकरी कर बेटे को अधिकारी बनाने का सपना देख रहे थे, जो इस हादसे के साथ ही टूट गया।

तीसरी घटना नेमदारगंज थाना क्षेत्र के वरेव गांव के पास NH-20 पर हुई, जहां एक अनियंत्रित वाहन ने कार में जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में हजारीबाग के पांच लोग—आशियान खान, शमशेर, मो फैजान, मो काशिम और राजा—गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी पटना से लौट रहे थे। घायलों को सदर अस्पताल में भर्ती कराने के बाद हायर सेंटर रेफर किया गया है।

तीनों घटनाओं ने एक बार फिर जिले में बेलगाम रफ्तार और सड़क सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। लगातार हो रही मौतों के बावजूद न तो स्पीड कंट्रोल के ठोस इंतजाम दिख रहे हैं और न ही संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा उपाय। अब सवाल उठता है कि आखिर कब जागेगा प्रशासन?

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