न्यूरोसर्जन डॉ ब्रजेश ने कैसे सर पर लगे गंभीर चोट को बगैर सर्जरी के किया ठीक, पढ़ें पूरी खबर 

धर्मशीला देवी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में हुआ इलाज, बेहतर स्वास्थ्य सेवा का दिया मिसाल 

Report by Nawada News Xpress 

नवादा / सूरज कुमार 

नवादा जिले के रोह निवासी 30 वर्षीय राजेश कुमार को धर्मशीला देवी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के चिकित्सक ने स्वास्थ्य सेवा का मिसाल देते हुए बगैर ऑपरेशन के ही ठीक कर दिया। उक्त मरीज को जब धर्मशीला देवी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में लाया गया था,

तब सर पर काफी गंभीर चोट होने के कारण उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई थी। पिछले 4 अप्रैल को रोह में हुई सड़क दुर्घटना में राजेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गये थे। सर पर गंभीर चोट लगने के बाद तुरंत बेहोश हो गये थे।

घटना के बाद उन्हें कई अस्पताल ले जाया गया, जहां सर पर चोट के कारण इलाज करने से मना कर दिया गया। जब उन्हें धर्मशीला देवी अस्पताल लाया गया, तब तुरंत डॉक्टर्स की टीम ने उनका इलाज शुरू कर दिया। जांच करने पर पाया गया कि उनके सर के अंदरूनी हिस्से मे काफ़ी चोट है और दाहिने आंख के उपर वाली हड्डी भी टूटी हुई है, जिससे आंख की रौशनी भी चली गयी है ।

धर्मशीला देवी अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉ ब्रजेश कुमार ने जांच के बाद यह निर्णय लिया कि बिना मस्तिष्क सर्जरी किये सिर्फ दवा से मरीज का इलाज किया जायेगा। उन्होंने कहा कि कई केसेस में सर्जरी करना भी मरीज के लिए घातक सिद्ध होता है।

लगातार दवा और उपचार के बाद मात्र चार दिनों मे मरीज़ के ब्रेन के सूजन को ठीक किया गया और उसकी आंख की रौशनी भी बढ़ गयी। डॉ ब्रजेश के द्वारा बगैर सर्जरी के मरीज को बचाने और उसे ठीक कर देने पर परिजन भी काफ़ी खुश हैं। 

मरीज के भाई संजीत ने बताया कि जब वह अपने भाई को अस्पताल ले कर आये थे, तब उन्हें उम्मीद नहीं थी कि मरीज बच पायेगा, लेकिन डॉ ब्रजेश की टीम ने जिस तरीके से मरीज का इलाज कर उसे ठीक किया यह एक चमत्कार से कम नहीं है।

अस्पताल की सुविधाएं एवं सेवा से मरीज के परिजन संतुष्ट दिखे और उन्होंने उम्मीद जताई की आगे भी यह अस्पताल ऐसे ही मरीजों की सेवा करता रहेगा। गौरतलब हो कि इससे पहले भी डॉ ब्रजेश ने एक महीने के अंदर सात से ज्यादा मस्तिष्क की जटिल सर्जरी सफलता पूर्वक कर चुके हैं और वे सभी मरीज़ बिलकुल स्वास्थ्य हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page