“जहां पढ़ाई होती है अंग्रेजी की, वहां गूंजे संस्कृत के मंत्र… गणेश चतुर्थी पर मॉडर्न में दिखा अनोखा नजारा”

वहां गूंजे संस्कृत के मंत्र…

गणपति पूजन के साथ वैदिक मंत्रोच्चार और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन, डॉ. अनुज बोले—संस्कृत भारत की ज्ञान और संस्कृति की अमूल्य धरोहर

Report by Nawada News Xpress/ नवादा / सूरज कुमार

नवादा। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर मंगलवार को मॉडर्न इंगलिश स्कूल का परिसर संस्कृत श्लोकों, वैदिक मंत्रोच्चार और गणेश वंदना से गूंज उठा। श्रद्धा और उल्लास के बीच आयोजित विशेष संस्कृत एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा की समृद्ध परंपरा को जीवंत कर दिया।

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कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद विद्यार्थियों ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ गणेश वंदना प्रस्तुत की। संस्कृत श्लोकों और मंत्रोच्चार की गूंज से पूरा विद्यालय परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।

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कार्यक्रम के दौरान श्रृष्टि, राधिका, समृद्धि, मुस्कान, गुंजन, प्रिया, सुप्रिया, अंजलि एवं सना ने संस्कृत श्लोक, गणेश वंदना और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर खूब तालियां बटोरीं। वहीं अमर, आदर्श, लक्ष्य, आदित्य, प्रियांशु, किस्मत, उदय, रुद्रांश, अमन, उज्ज्वल एवं मानव ने संस्कृत संवाद, श्लोक-पाठ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

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विद्यार्थियों ने ‘वक्रतुण्ड महाकाय’ सहित विभिन्न संस्कृत श्लोकों एवं गणेश स्तोत्र का सस्वर पाठ किया। प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीगणेश को ज्ञान, बुद्धि, विवेक और शुभारंभ का प्रतीक बताते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया गया। विद्यार्थियों की सामूहिक प्रस्तुति कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही।

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संस्कृत केवल भाषा नहीं, हमारी सांस्कृतिक पहचान : डॉ. अनुज
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मॉडर्न शैक्षणिक समूह के निदेशक डॉ. अनुज कुमार सिंह ने कहा कि भगवान श्रीगणेश ज्ञान, बुद्धि और विवेक के प्रतीक हैं। गणेश चतुर्थी जीवन में सकारात्मकता, अनुशासन और सद्बुद्धि अपनाने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता की अमूल्य धरोहर है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और प्रतिभा को भी निखारते हैं।

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विद्यालय परिवार ने कार्यक्रम में भाग लेने वाले विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। अंत में भगवान श्रीगणेश की आरती और प्रसाद वितरण किया गया। ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय की संस्कृत शिक्षिका ममता मंडल, शिक्षक शैलेंद्र पांडेय सहित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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