हिसुआ में 40 हजार लेकर कराया भर्ती, बिगड़ती रही हालत… मौत के बाद पुलिस पहुंची तो गायब मिला कथित डॉक्टर; चार दिन पहले गोविंदपुर में भी उठे थे इलाज पर सवाल
Report by Nawada News Xpress/ नवादा / सूरज कुमार

नवादा। जिले में कथित झोलाछाप डॉक्टरों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। गोविंदपुर में बुखार के इलाज के दौरान युवक की मौत के बाद अब हिसुआ में नशे की लत छुड़ाने के नाम पर कथित इलाज के दौरान 17 वर्षीय युवक की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद आरोपी डॉक्टर क्लिनिक बंद कर फरार हो गया। पुलिस अब मौत की असली वजह और इलाज की पूरी प्रक्रिया की जांच में जुटी है। मृतक की पहचान नालंदा जिले के निश्चलगंज गांव निवासी दिनेश पांडेय के 17 वर्षीय पुत्र प्रिंस कुमार के रूप में हुई है। वर्तमान में वह राजगीर के तुलसी गली में रह रहा था।

परिजनों के अनुसार प्रिंस नशे की लत से परेशान था। परिवार उसे नशे की आदत से बाहर निकालना चाहता था। इसी दौरान कथित दलाल के माध्यम से हिसुआ स्थित नौशाद आलम की क्लिनिक की जानकारी मिली। परिवार का दावा है कि वहां नशा मुक्ति का इलाज कराने की बात कही गई थी। परिजनों के मुताबिक इलाज के नाम पर 50 हजार रुपये मांगे गए और करीब 40 हजार रुपये अग्रिम देकर प्रिंस को क्लिनिक में भर्ती कराया गया। आरोप है कि भर्ती रहने के दौरान तीन दिनों तक प्रिंस को सांस लेने में परेशानी होती रही, लेकिन परिजनों को उसके ठीक होने का भरोसा दिया जाता रहा।

शुक्रवार की रात अचानक उसकी हालत ज्यादा बिगड़ गई। परिजनों के अनुसार कथित डॉक्टर ने ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने की बात कहते हुए उसे दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी। परिजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद प्रिंस को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिवार में कोहराम मच गया। घटना की सूचना मिलने पर हिसुआ थाना पुलिस कथित क्लिनिक पहुंची, लेकिन तब तक क्लिनिक बंद था और आरोपी डॉक्टर मौके से फरार हो चुका था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है। पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की वास्तविक वजह सामने आने में मदद मिलेगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि संबंधित व्यक्ति के पास इलाज करने की वैध योग्यता और जरूरी अनुमति थी या नहीं।

चार दिन पहले गोविंदपुर में भी उठे थे सवाल
हिसुआ की इस घटना से महज चार दिन पहले गोविंदपुर थाना क्षेत्र में भी एक कथित झोलाछाप डॉक्टर पर बुखार के इलाज के दौरान युवक की मौत का आरोप लगा था। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने जिले में कथित नीम-हकीमों और निजी क्लिनिकों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि हिसुआ मामले में डॉक्टर पर लगाए गए इलाज में लापरवाही और पैसे लेने के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रिंस की हालत आखिर तीन दिनों में क्यों बिगड़ती रही, समय रहते उचित इलाज क्यों नहीं मिला और पुलिस के पहुंचने से पहले क्लिनिक बंद कर कथित डॉक्टर क्यों फरार हो गया? इन सवालों का जवाब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच से मिलने की उम्मीद है।


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