सिर्फ स्मार्टफोन से खाँसी रिकॉर्ड करते ही AI बताएगा संभावित खतरे का संकेत, आनंद वर्मा के ‘KasaCheck AI’ का IIT पटना तक हुआ चयन
Report by Nawada News Xpress / नवादा / सूरज कुमार

नवादा। जिले के वारिसलीगंज प्रखंड के रहने वाले कक्षा 12वीं के छात्र आनंद वर्मा ने अपनी प्रतिभा और तकनीकी सोच से ऐसा AI आधारित हेल्थटेक प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जो आने वाले समय में श्वसन स्वास्थ्य की प्रारंभिक स्क्रीनिंग के क्षेत्र में उपयोगी साबित हो सकता है। गांधी इंटर स्कूल, नवादा में अध्ययनरत आनंद ने ‘KasaCheck AI’ नामक प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जो खाँसी की आवाज का विश्लेषण कर फेफड़ों एवं श्वसन संबंधी बीमारियों के संभावित जोखिम का प्रारंभिक आकलन करने का प्रयास करता है। आनंद सर्राफा व्यवसायी विजय कुमार एवं बबीता देवी के पुत्र हैं। उन्होंने दसवीं तक की पढ़ाई सेंट टेरेसा इंग्लिश हाई स्कूल, वारिसलीगंज से पूरी की है। खास बात यह है कि उन्होंने AI और मशीन लर्निंग की शिक्षा किसी महंगे संस्थान से नहीं, बल्कि YouTube और अन्य निःशुल्क ऑनलाइन संसाधनों के माध्यम से स्वयं सीखकर हासिल की।

कक्षा 11 में शुरू हुआ सफर, महीनों की मेहनत से बना प्लेटफॉर्म
आनंद ने इस प्रोजेक्ट की शुरुआत कक्षा 11 के अंतिम महीनों में की थी। शुरुआत में इसका नाम ‘KasaHealth AI’ रखा गया था, जिसे बाद में इसके उद्देश्य को अधिक स्पष्ट करने के लिए ‘KasaCheck AI’ नाम दिया गया। लगातार रिसर्च, प्रयोग और सीखने की प्रक्रिया के बाद उन्होंने इसे एक कार्यशील AI प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया। ‘Kasa’ संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ खाँसी होता है। इसी से प्रेरित होकर प्लेटफॉर्म का नाम KasaCheck AI रखा गया।

स्मार्टफोन से खाँसी रिकॉर्ड करें, AI करेगा प्रारंभिक जोखिम का आकलन
KasaCheck AI में उपयोगकर्ता अपनी खाँसी की आवाज स्मार्टफोन के माध्यम से रिकॉर्ड करता है। इसके बाद AI उस ऑडियो का विश्लेषण कर कुछ ही सेकंड में संभावित जोखिम का प्रारंभिक आकलन करने का प्रयास करता है। यदि आवश्यकता महसूस होती है तो उपयोगकर्ता को चिकित्सकीय जाँच और डॉक्टर से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि आनंद स्पष्ट करते हैं कि KasaCheck AI कोई चिकित्सीय निदान नहीं देता। इसका उद्देश्य बीमारी की पुष्टि करना नहीं, बल्कि संभावित जोखिम का शुरुआती संकेत देकर लोगों को समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लेने के लिए प्रेरित करना है।

टीबी, अस्थमा और COPD जैसी बीमारियों के खिलाफ तकनीकी पहल
भारत में वायु प्रदूषण, तंबाकू सेवन, बायोमास ईंधन और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित उपलब्धता के कारण श्वसन संबंधी बीमारियां बड़ी चुनौती हैं। कई बार शुरुआती लक्षणों की अनदेखी के कारण बीमारी की पहचान देर से होती है। आनंद का प्रयास इसी चुनौती के बीच तकनीक की मदद से प्रारंभिक स्क्रीनिंग को आसान और सुलभ बनाने की दिशा में है। खासकर ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में, जहां उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, ऐसी तकनीक भविष्य में उपयोगी हो सकती है।

150 से अधिक प्रारंभिक परीक्षण, बीटा टेस्ट में करीब 85% सटीकता
आनंद के अनुसार अब तक KasaCheck AI पर 150 से अधिक प्रारंभिक परीक्षण किए जा चुके हैं। पहले बीटा परीक्षण में करीब 85 प्रतिशत सटीकता प्राप्त होने का दावा किया गया है। परियोजना का चयन IIT पटना, CIMP और बिहार सरकार के Startup Accelerator Program में भी हुआ है। अब विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में इस तकनीक को और बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

सिर्फ AI प्रोजेक्ट नहीं, दूसरे छात्रों को भी तकनीक से जोड़ रहे आनंद
KasaCheck AI से पहले आनंद NexStep और InsightEd जैसे कई AI आधारित प्रोजेक्ट भी तैयार कर चुके हैं। इतना ही नहीं, वे स्कूलों में हाई स्कूल के विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क AI जागरूकता कक्षाएं भी आयोजित करते हैं, ताकि छोटे शहरों और कस्बों के छात्र भी आधुनिक तकनीक और AI की दुनिया से जुड़ सकें। आनंद की इस उपलब्धि के लिए उन्हें सर्टिफिकेट भी प्रदान किया गया है। सीमित संसाधनों के बीच खुद सीखकर तकनीक विकसित करने वाले आनंद वर्मा की कहानी नवादा के उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो बड़े शहरों या महंगे संस्थानों के बिना भी अपने हुनर और मेहनत के दम पर नई पहचान बनाना चाहते हैं। एक छोटे शहर का छात्र, मुफ्त ऑनलाइन संसाधनों से सीखकर AI की दुनिया में कदम रखता है और स्वास्थ्य जैसी बड़ी समस्या के समाधान की दिशा में तकनीक तैयार करता है—आनंद वर्मा की यह पहल वाकई नवादा के लिए गर्व की बात है।


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