दहेज की भूख ने ससुराल वालों को बना दिया हैवान, पति पर मोबाइल चार्जर के तार से गला दबाकर हत्या का आरोप, पति और सास गिरफ्तार, गांव में सनसनी
Report by Nawada News Xpress/ नवादा / सूरज कुमार

नवादा। दहेज की मांग ने एक और विवाहिता की जिंदगी निगल ली। नवादा जिले के नरहट थाना क्षेत्र के झिकरुआ गांव में एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मायके पक्ष ने आरोप लगाया है कि डेढ़ लाख रुपये, बाइक और अन्य सामान की मांग पूरी नहीं होने पर विवाहिता की बेरहमी से हत्या कर दी गई। घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतका के पति और सास को गिरफ्तार कर लिया है।

मृतका की पहचान झिकरुआ गांव निवासी रेखा कुमारी के रूप में हुई है, जो कन्हैया चौहान की पत्नी थी। मृतका की मां के बयान पर नरहट थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है, जिसमें ससुराल पक्ष के पांच लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है। परिजनों का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद से ही रेखा पर मायके से डेढ़ लाख रुपये, बाइक और अन्य सामान लाने का दबाव बनाया जा रहा था। मांग पूरी नहीं होने पर उसके साथ लगातार मारपीट और मानसिक प्रताड़ना की जाती थी। आरोप है कि बीती रात उसके पति ने मोबाइल चार्जर के तार से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।

मायके पक्ष का कहना है कि रेखा के शरीर पर कई जगह गंभीर चोटों के निशान मिले हैं, जो यह संकेत देते हैं कि हत्या से पहले उसके साथ मारपीट भी की गई थी। घटना की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और गांव में शोक व आक्रोश का माहौल बन गया। नरहट थानाध्यक्ष गौतम कुमार ने मीडिया को बताया कि मृतका की मां के बयान पर मामला दर्ज कर लिया गया है। मामले में नामजद दो आरोपियों पति कन्हैया चौहान और सास लाल परी देवी को गिरफ्तार कर लिया गया है। शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।

दहेज की आग में कब तक जलती रहेंगी बेटियां? एक बेटी की मौत नहीं, समाज के माथे पर कलंक है यह घटना
दहेज के लालच में बेटियों की बलि लेने वाली मानसिकता आज भी समाज के लिए सबसे बड़ा अभिशाप बनी हुई है। कानून सख्त हैं, लेकिन लालच की अंधी दौड़ में इंसानियत बार-बार हार रही है। झिकरुआ की यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए चेतावनी है जो दहेज को अपना अधिकार समझते हैं। बेटी कोई सौदा नहीं, सम्मान और जीवन का अधिकार रखने वाली इंसान है। दहेज के लिए होने वाली हर मौत समाज की सामूहिक विफलता ही नहीं बल्कि मानवता के नाम पर एक कलंक है।


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