विशेषज्ञयों ने बताए मधुमेह के शुरुआती संकेत और बचाव के उपाय, बोले—समय पर जांच व अनुशासित जीवनशैली से टल सकती हैं गंभीर जटिलताएं
Report by Nawada News Xpress/ नवादा / सूरज कुमार

नवादा। मॉडर्न ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के तत्वावधान में समूह के अंतर्गत संचालित तीनों नर्सिंग महाविद्यालयों—गुरोबिन्दाjjj कॉलेज नर्सिंग, त्रिवेणी कॉलेज नर्सिंग एवं नवादा कॉलेज नर्सिंग—में ‘डायबिटीज मेलिटस’ विषय पर विशेष शैक्षणिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नर्सिंग विद्यार्थियों को मधुमेह के कारण, लक्षण, प्रकार, रोकथाम, उपचार एवं रोग प्रबंधन की जानकारी देकर उन्हें स्वास्थ्य जागरूकता के लिए तैयार करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ मॉडर्न शैक्षणिक समूह, नवादा के सचिव डॉ. शैलेश कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ एवं अतिथि उपस्थित रहे। इनमें प्रो. नलिन के. शास्त्री, पूर्व कुलसचिव (मगध विश्वविद्यालय, बोधगया, इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली एवं डॉ. अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ), अजीत सिन्हा, लर्निंग एंड डेवलपमेंट एक्सपर्ट एवं पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक, जीवन बीमा निगम तथा डॉ. चंद्रभूषण कुमार शर्मा, प्रख्यात शिशु रोग विशेषज्ञ एवं पूर्व प्राचार्य, पीएमसीएच, पटना प्रमुख रहे।

डॉ. शैलेश कुमार ने दिया जागरूकता पर जोर
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ. शैलेश कुमार ने कहा कि मधुमेह तेजी से बढ़ती जीवनशैली संबंधी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। नर्सिंग विद्यार्थियों की भूमिका केवल मरीजों की देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, व्यायाम और अनुशासित जीवनशैली अपनाकर मधुमेह के जोखिम को कम किया जा सकता है।

विशेषज्ञों ने खोले मधुमेह से जुड़े कई अहम पहलू
प्रो. नलिन के. शास्त्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को समाज की वास्तविक समस्याओं के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार बनाना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से मधुमेह जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के प्रति लोगों को जागरूक करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। वहीं अजीत सिन्हा ने स्वास्थ्य को जीवन की सबसे महत्वपूर्ण पूंजी बताते हुए कहा कि तनाव, अनियमित खान-पान और शारीरिक निष्क्रियता कई बीमारियों को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वयं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के साथ परिवार और समाज को भी इसके लिए प्रेरित करने की सलाह दी। डॉ. चंद्रभूषण कुमार शर्मा ने मधुमेह के चिकित्सकीय पक्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने टाइप-1, टाइप-2 एवं जेस्टेशनल डायबिटीज के विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए शुरुआती लक्षणों की पहचान, समय पर जांच और चिकित्सकीय परामर्श के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि समय रहते पहचान और उचित प्रबंधन से मधुमेह से जुड़ी अनेक जटिलताओं से बचाव संभव है।

तीनों नर्सिंग कॉलेजों के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
गुरोबिन्दा नर्सिंग कॉलेज में ट्यूटर शोभा कुमारी, शिवानी कुमारी एवं मोती मणि के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने संगोष्ठी में सक्रिय सहभागिता की। त्रिवेणी कॉलेज ऑफ एजुकेशन (नर्सिंग) में ट्यूटर निशु कुमारी भारती एवं कुमारी अपर्णा के निर्देशन में विद्यार्थियों को मधुमेह के शुरुआती लक्षण, रक्त शर्करा की जांच, मरीज की देखभाल और स्वस्थ जीवनशैली की जानकारी दी गई। नवादा कॉलेज ऑफ नर्सिंग में ट्यूटर प्रीति कुमारी एवं सोना मणि के मार्गदर्शन में छात्राओं ने मधुमेह की रोकथाम एवं नियंत्रण के विभिन्न उपायों को समझा।कार्यक्रम में GBCN से अंशु, नित्यु एवं मनीषा, TCE(N) से रानी राजलक्ष्मी, रूपा, शशांक एवं विकास तथा NCN से निक्की, सिमरन एवं ट्विंकल सहित अन्य विद्यार्थी उपस्थित रहे। संगोष्ठी के समापन पर वक्ताओं ने संदेश दिया कि समय पर जांच, संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और चिकित्सिय सलाह का पालन कर मधुमेह को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी रहा और सभी ने स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।


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