नशे पर ऐसा शिकंजा कि बंदी नीम की छाल चबाने को हैं मजबूर, पूरे बिहार में बिहारशरीफ जेल की हो रही चर्चा

सलाखों के पीछे नशे को मिली मात, बिहारशरीफ मंडल कारा ने पेश किया नशामुक्ति की मिसाल, खैनी तक पर पूरी तरह रोक, 800 से अधिक बंदियों के बीच नहीं मिला कोई नशीला पदार्थ

Report by Nawada News Xpress/ नवादा / नालंदा। अविनाश पांडेय

बिहार सरकार जहां पूरे राज्य में नशामुक्ति अभियान को सफल बनाने की चुनौती से जूझ रही है, वहीं बिहारशरीफ मंडल कारा इस दिशा में एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभर रहा है। जेल प्रशासन की सख्ती और लगातार निगरानी का असर ऐसा है कि कारा परिसर में किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ की उपलब्धता लगभग पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। यहां तक कि बंदियों को खैनी जैसी सामान्य नशे की वस्तु भी नसीब नहीं हो रही है। हाल ही में जमानत पर जेल से बाहर आए कुछ बंदियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि खैनी की लत से परेशान कुछ बंदी अपनी तलब शांत करने के लिए जेल परिसर में लगे नीम के पेड़ों की छाल तक चबाने को मजबूर हैं।

यह जानकारी जेल प्रशासन द्वारा नशे के खिलाफ अपनाई गई सख्त नीति की हकीकत बयां करती है। जानकारी के अनुसार, बिहारशरीफ मंडल कारा में वर्तमान में 800 से अधिक बंदी निरुद्ध हैं। जेल प्रशासन द्वारा नियमित तलाशी, कड़ी निगरानी और अनुशासनात्मक कार्रवाई के कारण जेल के भीतर नशे का कोई नेटवर्क विकसित नहीं हो सका है। जिला प्रशासन और पुलिस की टीम भी समय-समय पर कारा परिसर में छापेमारी करती है, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार का नशीला पदार्थ या प्रतिबंधित सामग्री बरामद नहीं हुई है। कारा प्रशासन का दावा है कि नशामुक्त वातावरण का सकारात्मक प्रभाव बंदियों के स्वास्थ्य और व्यवहार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पहले जहां कई बंदी नशे की लत से जुड़ी शारीरिक और मानसिक समस्याओं से जूझते थे, वहीं अब उनकी दिनचर्या अधिक व्यवस्थित हुई है और स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिला है।

नशे के खिलाफ मंडल कारा बिहारशरीफ की यह पहल न केवल नशामुक्ति अभियान की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, बल्कि यह भी साबित कर रही है कि सख्त निगरानी, मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयासों से नशे जैसी सामाजिक बुराई पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। यही वजह है कि बिहारशरीफ मंडल कारा का मॉडल अब अन्य जेलों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बनता जा रहा है। गौरतलब हो कि बिहार शरीफ जेल के वर्तमान जेल अधीक्षक अभिषेक पांडेय पूर्व में नवादा मंडल कारा के लिए भी कई बड़े कार्य कर चुके हैं। उन्होंने नवादा मंडल कारा में राज्य का पहला खाद्यपदार्थों के मानकों के तहत रसोई की व्यवस्था किया था, जिसके बाद से यहां बंदियों को शु़़द्ध भोजन मिलने लगा। जिसकी चर्चा राज्य भर में हुई थी।

क्या कहते हैं जेल अधीक्षक
मंडल कारा बिहारशरीफ के जेल अधीक्षक अभिषेक पांडेय ने कहा कि मंडल कारा में आया यह सकारात्मक बदलाव नालंदा के जिलाधिकारी कुंदन कुमार के सफल नेतृत्व, मार्गदर्शन और प्रेरणा का परिणाम है। उन्होंने बताया कि रजनीश सिंह द्वारा नशामुक्ति को लेकर दिए जा रहे निर्देशों का पूरी गंभीरता से पालन किया जा रहा है। जेल प्रशासन नियमित रूप से सभी वार्डों की तलाशी लेता है तथा बंदियों को नशे से होने वाली बीमारियों और उसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक भी किया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page