ICM 2.0 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया भर के विद्वानों ने साझा किए विचार, एआई आधारित मार्केटिंग और उपभोक्ता व्यवहार पर हुई गहन चर्चा
Report by Nawada News Xpress / नवादा / सूरज कुमार

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) बोधगया में 14–15 मार्च को आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन मार्केटिंग (ICM 2.0) वैश्विक बौद्धिक संवाद का महत्वपूर्ण मंच बन गया। “उपभोक्ता अनुभव और मार्केटिंग रणनीतियों में एआई-आधारित परिवर्तन” विषय पर आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश से आए शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में IIM बोधगया की निदेशक प्रो. विनिता एस. सहाय ने स्वागत भाषण देते हुए संस्थान की उस सोच को साझा किया, जिसके तहत प्रभावशाली शोध को बढ़ावा देने के साथ-साथ छात्रों को तकनीक और डेटा-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि संस्थान शिक्षण, शोध और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में एआई के समावेशन की दिशा में लगातार पहल कर रहा है, ताकि भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं को बदलते डिजिटल परिदृश्य के अनुरूप तैयार किया जा सके।

सम्मेलन में कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। इनमें IIM अहमदाबाद के प्रो. आनंद के. जायसवाल, टेक्सास स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रो. आदित्य गुप्ता, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी की प्रो. गीता मेनन, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (हैदराबाद) के प्रो. मधु विश्वनाथन, IIM कोझिकोड की प्रो. शफाली गुप्ता और सनवे यूनिवर्सिटी के प्रो. वेंग मार्क लिम शामिल रहे। इन वक्ताओं ने एआई आधारित मार्केटिंग, डिजिटल बाज़ारों के विकास, इंटेलिजेंट रिकमेंडर सिस्टम और व्यावसायिक निर्णय-प्रक्रिया में डेटा के बढ़ते महत्व पर गहन चर्चा की।

वक्ताओं ने कहा कि मशीन लर्निंग, प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स और डेटा इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकें कंपनियों को उपभोक्ताओं की पसंद-नापसंद को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर रही हैं। इससे कंपनियां अधिक व्यक्तिगत और प्रभावी उपभोक्ता अनुभव तैयार कर पा रही हैं। साथ ही उन्होंने डेटा गोपनीयता, नैतिकता और तकनीक के जिम्मेदार उपयोग जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी उपस्थित रहे।

उन्होंने एआई के व्यापक सामाजिक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ समाज में विश्वास बनाए रखना, लोगों को केंद्र में रखकर बदलाव को अपनाना और निरंतर कौशल विकास को प्राथमिकता देना बेहद आवश्यक है। उन्होंने तकनीक, पर्यावरण और सामाजिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता भी बताई। ICM 2.0 को छह प्रमुख विषयों के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिनमें मार्केटिंग एनालिटिक्स, डिजिटल अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता व्यवहार, एआई आधारित संचार रणनीतियां, विभिन्न क्षेत्रों में एआई का उपयोग, स्थिरता और नैतिकता तथा उभरती शोध पद्धतियां शामिल रही।

सम्मेलन के लिए कुल 260 से अधिक शोध पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से कठोर समीक्षा प्रक्रिया के बाद 205 शोध पत्र स्वीकार किए गए। दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में ऑफलाइन और ऑनलाइन सत्रों के माध्यम से 120 से अधिक शोध प्रस्तुतियां दी गई। सम्मेलन के आयोजन का समन्वय डॉ. पिनाज़ तिवारी, डॉ. अनुप ए. सोरेन और डॉ. चंदन प्रसाद ने किया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में IIM अहमदाबाद, IIM बैंगलोर और IIT (ISM) धनबाद सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के विद्वानों की भागीदारी रही। मुख्य भाषणों, तकनीकी सत्रों और शोध प्रस्तुतियों के माध्यम से ICM 2.0 ने यह स्पष्ट कर दिया कि IIM बोधगया मार्केटिंग, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में वैश्विक शैक्षणिक संवाद का तेजी से उभरता केंद्र बन रहा है।


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