11 साल पुराने रेट पर जमीन अधिग्रहण! अब पटना हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

मंझवे–गोविन्दपुर पथ के लिए मुआवजा अब मिलेगा वर्तमान सर्किल दर पर, हजारों रैय्यतों को राहत

Report by Nawada News Xpress / नवादा / सूरज कुमार

निर्माणाधीन मंझवे–गोविन्दपुर पथ (राज्य उच्च पथ संख्या-103) के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे को लेकर चल रहे विवाद पर आखिरकार बड़ा फैसला आ गया है। पटना उच्च न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिया है कि अधिग्रहित भूमि का मुआवजा वर्तमान (अधतन) सर्किल दर के आधार पर नये सिरे से तय किया जाए।

माननीय न्यायाधीश पुणेंदु सिंह ने ककोलत रोड मुआवजा समिति द्वारा दायर याचिका की सुनवाई करते हुए भू-अर्जन से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पुरानी दरों को दरकिनार कर वर्तमान सर्किल दर पर मुआवजे की पुनर्गणना करें।

2014 की दर पर तय हुआ था मुआवजा, कोर्ट ने माना ‘न्याय के खिलाफ’

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में बताया था कि इस सड़क परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन का मुआवजा वर्ष 2014 की सर्किल दर पर निर्धारित किया गया था, जो 11 वर्ष पुरानी है। उनका तर्क था कि यह दर वर्तमान बाजार मूल्य की तुलना में बेहद कम है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के प्रतिकूल है। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने माना कि वर्तमान परिस्थिति में अद्यतन दर से मुआवजा तय किया जाना ही न्यायसंगत होगा।

समिति की ओर से दायर की थी याचिका

ककोलत रोड मुआवजा समिति के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता सैयद मसीह उद्दीन ने बताया कि समिति की ओर से इसके सचिव ललन सिंह के साथ रजहत ग्राम निवासी काजी सैयद मुनअम, बलिया बुजुर्ग ग्राम निवासी अरविंद घोष तथा अकबरपुर बाजार निवासी रोहन प्रसाद गुप्ता ने सी.डब्ल्यू.जे.सी. संख्या- 1701/2026 दायर की थी। इस मामले की सुनवाई 3 फरवरी को पटना हाईकोर्ट में हुई थी, जिसके बाद यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया गया।

47 किलोमीटर सड़क, हजारों रैय्यत प्रभावित

करीब 47 किलोमीटर लंबे मंझवे–गोविन्दपुर पथ के चौड़ीकरण से हजारों रैय्यत प्रभावित हुए हैं। अब हाईकोर्ट के इस फैसले से प्रभावित जमीन मालिकों में बाजार मूल्य के अनुरूप उचित मुआवजा मिलने की नई उम्मीद जगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए नई दर से भुगतान करता है, तो यह हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।

अब निगाहें प्रशासन पर

हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद अब सबकी नजरें भू-अर्जन विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे कितनी जल्दी नई सर्किल दर के आधार पर मुआवजे की गणना पूरी कर भुगतान प्रक्रिया शुरू करते हैं। यह फैसला न केवल मंझवे–गोविन्दपुर पथ के प्रभावित रैय्यतों के लिए अहम है, बल्कि भविष्य में होने वाले भूमि अधिग्रहण मामलों के लिए भी एक मिसाल माना जा रहा है।

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