तीन दशक की तपस्या को मिला सम्मान, भावुक हुआ मॉडर्न इंगलिश स्कूल

वरिष्ठ शिक्षक प्रमोद पाठक को सेवानिवृत्ति पर भव्य विदाई, डॉ. अनुज सिंह बोले—“शिक्षक सेवानिवृत्त होता है, उसका ज्ञान और संस्कार नहीं”
Report by Nawada News Xpress/ नवादा / सूरज कुमार
नवादा। मॉडर्न इंगलिश स्कूल में उस समय माहौल भावुक हो उठा, जब हिंदी एवं संस्कृत के वरिष्ठ शिक्षक प्रमोद पाठक को करीब तीन दशक की गौरवपूर्ण सेवा के बाद ससम्मान विदाई दी गई। वर्षों तक विद्यार्थियों को ज्ञान, भाषा, साहित्य और संस्कारों की शिक्षा देने वाले प्रमोद पाठक की सेवानिवृत्ति पर विद्यालय परिवार ने भव्य विदाई-सम्मान समारोह आयोजित कर उनके योगदान को याद किया। समारोह में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं, प्राचार्यों, उपप्राचार्यों, कर्मियों और विद्यार्थियों ने उन्हें पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र, स्मृति-चिह्न एवं सम्मान सामग्री भेंट कर सम्मानित किया। सहकर्मियों ने उनके सरल-सौम्य व्यवहार, अनुशासनप्रियता, कर्तव्यनिष्ठा और शिक्षण के प्रति समर्पण की चर्चा करते हुए पुरानी यादें साझा कीं। कई मौके ऐसे भी आए, जब विदाई समारोह का माहौल भावुक हो गया।

1996 में शुरू हुआ सफर, तीन दशक बाद सम्मान के साथ विदाई
प्रमोद पाठक ने वर्ष 1996 में मॉडर्न इंगलिश स्कूल में योगदान दिया था। करीब 30 वर्षों तक हिंदी एवं संस्कृत शिक्षक के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षित किया और विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त हुए प्रमोद पाठक की सेवा यात्रा विद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण अध्याय रही।उन्होंने शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि विद्यार्थियों को हिंदी-संस्कृत भाषा, साहित्य, भारतीय संस्कृति, परंपरा और संस्कारों से जोड़ने का निरंतर प्रयास किया।

डॉ. अनुज सिंह बोले—“शिक्षक का योगदान कभी सेवानिवृत्त नहीं होता”
विद्यालय के निदेशक डॉ. अनुज सिंह ने प्रमोद पाठक के करीब तीन दशक लंबे योगदान की सराहना करते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति सेवा का अंत हो सकती है, लेकिन शिक्षक का समाज के प्रति योगदान कभी समाप्त नहीं होता। उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने ज्ञान, संस्कार और प्रेरणा से कई पीढ़ियों का निर्माण करता है। इसलिए पद से सेवानिवृत्ति के बाद भी उसका अनुभव और मार्गदर्शन समाज एवं विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बना रहता है। डॉ. सिंह ने प्रमोद पाठक की निष्ठा और समर्पण की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ, सुखमय एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।

“उनकी कमी हमेशा महसूस होगी”—प्राचार्य गोपाल चरण दास
विद्यालय के प्राचार्य गोपाल चरण दास ने कहा कि प्रमोद पाठक ने अपने व्यवहार और कार्यशैली से विद्यालय परिवार को हमेशा एकजुट रखने का प्रयास किया। सहकर्मियों के साथ बेहतर समन्वय और विद्यार्थियों के प्रति संवेदनशीलता उनकी कार्यशैली की विशेष पहचान रही। उन्होंने कहा कि ऐसे अनुभवी एवं समर्पित शिक्षक की सेवानिवृत्ति विद्यालय परिवार के लिए भावुक क्षण है और आने वाले समय में उनकी कमी निश्चित रूप से महसूस होगी।

विद्यार्थियों के हित को हमेशा दी प्राथमिकता
मॉडर्न इंगलिश स्कूल, न्यू एरिया के उपप्राचार्य सुजय कुमार ने कहा कि किसी भी संस्थान में सेवानिवृत्ति एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन विद्यार्थियों के हित में पूरी निष्ठा और ईमानदारी से किया गया कार्य हमेशा याद रहता है। उन्होंने कहा कि प्रमोद पाठक ने अपने कार्यकाल में विद्यार्थियों के हित को प्राथमिकता दी और विद्यालय परिवार के साथ आत्मीय संबंध बनाए रखा।
सहकर्मियों ने खोली यादों की पोटली, भावुक हुआ समारोह
विदाई समारोह में शिक्षकों ने प्रमोद पाठक के साथ बिताए वर्षों की यादें साझा कीं। वक्ताओं ने कहा कि किसी संस्था में तीन दशक तक निष्ठापूर्वक सेवा देना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। सहकर्मियों ने कहा कि एक शिक्षक की पहचान केवल उसके पढ़ाए पाठों से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन में छोड़ी गई ज्ञान, संस्कार और प्रेरणा की छाप से होती है। इस लिहाज से प्रमोद पाठक का योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।

अपने विदाई संबोधन में भावुक हुए प्रमोद पाठक
विदाई संबोधन में प्रमोद पाठक ने विद्यालय प्रबंधन, सहकर्मियों, विद्यार्थियों और पूरे विद्यालय परिवार के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि मॉडर्न इंगलिश स्कूल में बिताए तीन दशक उनके जीवन की अमूल्य स्मृतियों का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय परिवार से मिला स्नेह, सम्मान और सहयोग वे कभी नहीं भूल पाएंगे। विद्यार्थियों को उन्होंने निरंतर मेहनत, अनुशासन और भारतीय भाषा-संस्कृति एवं संस्कारों से जुड़े रहने की प्रेरणा दी।
सैकड़ों शिक्षक और प्राचार्य-उपप्राचार्य रहे मौजूद
समारोह में मॉडर्न शैक्षणिक समूह के विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्य एवं उपप्राचार्य समेत बड़ी संख्या में शिक्षक एवं विद्यालय परिवार के सदस्य मौजूद रहे। इस अवसर पर मणिकांत मिश्रा, विजय कुमार अकेला, नीरज मिश्रा, अरुण कुमार, द्वारका प्रसाद यादव सहित सैकड़ों शिक्षक उपस्थित रहे। सभी ने प्रमोद पाठक के दीर्घकालीन योगदान की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ, सुखी, समृद्ध एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।
पद से विदाई, लेकिन यादों से नहीं
समारोह के अंत में प्रमोद पाठक को विद्यालय परिवार ने ससम्मान विदाई दी। तीन दशक की उनकी सेवा यात्रा ने यह संदेश दिया कि एक शिक्षक अपने पद से सेवानिवृत्त हो सकता है, लेकिन उसके द्वारा दिया गया ज्ञान, संस्कार और प्रेरणा कभी सेवानिवृत्त नहीं होती। विद्यालय के विद्यार्थियों के जीवन में उनके द्वारा बोए गए ज्ञान और संस्कार के बीज आने वाली पीढ़ियों तक उनकी पहचान को जीवंत बनाए रखेंगे।

