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“डायन” के नाम पर खूनी खेल पर कोर्ट का बड़ा फैसला… महिला हत्या कांड में 8 दोषियों को सुनाया आजीवन कारावास की सजा 

7 साल बाद न्याय का बड़ा प्रहार, अंधविश्वास में की गई हत्या पर नवादा कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला ने दिया बड़ा सन्देश, अंधविश्वास के नाम पर हत्या करने वालों को नहीं मिलेगी माफी

Report by Nawada News Xpress/ नवादा / सूरज कुमार

अंधविश्वास और डायन प्रथा के नाम पर महिला की निर्मम हत्या करने वाले 8 दोषियों को नवादा व्यवहार न्यायालय ने कड़ी सजा सुनाई है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-11 आशुतोष खेतान की अदालत ने सभी आरोपियों को आजीवन सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाते हुए बड़ा संदेश दिया है कि कानून के सामने ऐसी अमानवीय घटनाओं के लिए कोई जगह नहीं है। यह मामला गोविंदपुर थाना क्षेत्र के कोलगढ़ गांव का है, जहां वर्ष 2019 में एक महिला को डायन बताकर पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया गया था। अदालत ने इस मामले में गांव के ही नरेश मांझी, सुरेश मांझी, बिरजु मांझी, कारू मांझी, तुलसी मांझी, त्रिलोकी मांझी, पुना मांझी और राजेश मांझी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

बीमारी से बेटे की मौत के बाद महिला को बनाया निशाना

जानकारी के अनुसार सुरेश मांझी के पुत्र की मौत बीमारी के कारण हुई थी। लेकिन अंधविश्वास में डूबे परिजनों ने गांव की मंती देवी को “डायन” बताकर लगातार प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। 23 जुलाई 2019 को सभी आरोपी महिला के घर में घुस गए और बेरहमी से उसकी पिटाई कर दी। गंभीर हालत में अस्पताल ले जाने के दौरान मंती देवी की मौत हो गई। घटना के बाद मृतका के पुत्र कमलेश कुमार ने गोविंदपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराया था। मामले की सुनवाई के दौरान गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों को हत्या का दोषी पाया।

हत्या के साथ डायन प्रथा कानून में भी सजा

अदालत ने सभी दोषियों को हत्या के मामले में आजीवन सश्रम कारावास और 5-5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं बिहार डायन प्रथा निवारण अधिनियम की धारा-03 के तहत 3 माह कैद और 500 रुपये जुर्माना तथा धारा-04 के तहत 6 माह कैद और 500 रुपये जुर्माने की अतिरिक्त सजा भी दी गई।

नवादा कोर्ट के फैसले से अंधविश्वास फैलाने वालों में संदेश

इस फैसले को समाज में फैले अंधविश्वास और डायन प्रथा जैसी कुप्रथाओं पर बड़ी कानूनी चोट माना जा रहा है। अदालत के इस फैसले के बाद इलाके में चर्चा तेज है कि अब कानून ऐसे मामलों में बेहद सख्त रुख अपना रही है।

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