भक्ति-सागर में डूबे श्रद्धालु! प्रवचन में प्रभंजनानंद जी महाराज ने क्यों कहा जीवन एक पवित्र यात्रा… पढ़ें पूरी खबर

प्रभु भक्ति, आचार-संहिता और सदाचार का संदेश देते हुए बोले प्रभंजनानंद शरण जी महाराज, भागवत कथा में उमड़ा जनसैलाब

Report by Nawada News Xpress / नवादा / सूरज कुमार

नवादा जिला मुख्यालय स्थित गांधी इंटर विद्यालय मैदान में चल रही परम् पूज्य डॉ. श्री प्रभंजनानंद शरण जी महाराज की श्रीमद्भागवत कथा में चौथे दिन मंगलवार को श्रद्धालु भक्ति और अध्यात्म में सराबोर दिखे। कथा स्थल पर भक्तों का ऐसा उत्साह उमड़ा कि पूरा मैदान भजन, कीर्तन और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।

कथा प्रवचन के दौरान प्रभंजनानंद शरण जी महाराज ने कहा कि “जीवन एक यात्रा है और श्रीमद्भागवत कथा मानव जीवन की आचार-संहिता, व्यवहार-संहिता और भवपार-संहिता है।” उन्होंने बताया कि भागवत में वर्णित आस्तिकता, धार्मिकता, व्यवहारिकता, प्रभु-भक्ति और उच्च नैतिक आदर्शों जैसा समग्र संदेश अन्यत्र दुर्लभ है। महाराज जी ने कहा कि “मानव के आदर्श चरित्र का यथार्थ रूप यदि कहीं जानना हो, तो श्रीमद्भागवत को अवश्य सुनें।” उन्होंने कहा— “संसार का संयोग अनित्य और वियोग नित्य है। जिन भौतिक वस्तुओं को हम महत्व देते हैं, वे वस्तुएं ही हमें परमात्मा से दूर ले जाती हैं।

उन्होंने यह भी कहा – यह संसार मेहंदी के पत्ते जैसा है—ऊपर से हरा दिखाई देता है पर भीतर परमात्मा की लाली से भरा है।” महाराज जी ने जीवन के सुख-दुख पर गहराई से प्रकाश डालते हुए कहा— “सुख के लिए केवल प्रयास ही नहीं, उचित दिशा में प्रयास आवश्यक है। दुख भगवान का दंड नहीं, हमारे कर्मों का परिणाम है। हर व्यक्ति सुख चाहता है, पर उसके प्रयास उलटी दिशा में होते हैं।” उन्होंने प्रश्न उठाया— “जब हम सच में सुख चाहते हैं, तो फिर उन रास्तों को क्यों नहीं छोड़ते, जिनसे दुख आता है? आपकी चाहत सही है, पर रास्ता सही होना चाहिए।”

महाराज जी ने मानसिक शांति का संदेश देते हुए कहा— “मन में कोई बोझ मत रखिए। मस्त रहिए—अस्त-व्यस्त नहीं। खुश रहिए, मुस्कुराते रहिए। दूसरों से घृणा कर अपनी ऊर्जा नष्ट न करें। प्रेम और आनंद के लिए जीवन में समय बहुत कम है। निंदा की ऊर्जा यदि प्रेम में लगा दें, तो जीवन स्वर्ग तुल्य बन जाएगा।” कथा के दौरान भक्तों द्वारा किए गए भजन-कीर्तन और ‘हरे कृष्ण’ के जयघोष से पूरा पंडाल आध्यात्मिक वातावरण में डूबा रहा। अगले दिन कथा सुनने के लिए और अधिक भक्तों के जुटने की संभावना जताई जा रही है।

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