जातिगत हिंसा पर अदालत का सख्त वार, महज 16 माह में आया ऐतिहासिक फैसला
Report by Nawada News Xpress / नवादा / सूरज कुमार

नवादा में अनुसूचित जाति के एक बालक की नृशंस हत्या के मामले में अदालत ने कड़ा और मिसाल कायम करने वाला फैसला सुनाया है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति विशेष न्यायालय के विशेष न्यायाधीश श्री संजय कुमार मिश्रा ने नरहट थाना क्षेत्र के बभनौर गांव निवासी मो. सोयेब, मो. रजा, मो. आदिल, मो. जावेद, मो. साबिर और मो. आमिर को सश्रम आजीवन कारावास तथा अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने घटना के महज 16 माह के भीतर दोषियों को सजा सुनाकर न्यायिक तत्परता का मजबूत संदेश दिया। यह मामला नरहट थाना कांड संख्या 326/24 से संबंधित है। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक मो. महबूब उद्दीन ने सशक्त पैरवी की।

घात लगाकर की गई थी बेरहमी से पिटाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 11 सितंबर 2024 की संध्या करीब 4 बजे, बभनौर गांव निवासी सरोज राजवंशी का पुत्र सन्नी कुमार सेराज नगर से अपने घर लौट रहा था। जैसे ही वह धनंजय नदी के पास रहमत नगर के समीप पहुंचा, पहले से घात लगाए बैठे सभी अभियुक्तों ने उसे घेर लिया और बेरहमी से पीटकर गंभीर रूप से जख्मी कर दिया। इलाज के दौरान सन्नी की मौत हो गई।

मां के बयान से दर्ज हुआ था मुकदमा
मृतक की मां गुड़िया देवी के बयान पर नरहट थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान गवाहों के सुसंगत और ठोस बयानों के आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी करार दिया।

बीएनएस और एससी/एसटी एक्ट में सख्त सजा
अदालत ने सभी दोषियों को बीएनएस की धारा 103(1) के तहत सश्रम आजीवन कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके साथ ही अन्य धाराओं एवं एससी/एसटी एक्ट के तहत भी सजा दी गई। सभी धाराओं को मिलाकर प्रत्येक अभियुक्त पर 30 हजार रुपये का कुल अर्थदंड लगाया गया है। यह फैसला न सिर्फ पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि समाज में यह स्पष्ट संदेश भी देता है कि अपराध करने वालों को कानून किसी भी सूरत में बख्शेगा नहीं।


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