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पौराणिक सीतामढ़ी धाम में मेला महोत्सव का ऐसे हुआ शुभारंभ, डीएम ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया उद्घाटन, पढ़ें पूरी खबर

सीतामढ़ी मेला 2025: माता सीता की तपस्थली व लव-कुश के जन्म स्थली और महर्षि वाल्मीकि की कुटिया की दर्शन को उमड़ी श्रद्धा—रामायण की स्मृतियाँ बनीं आकर्षण का केंद्र- लोक आस्था, संस्कृति और परंपरा के संगम ने नवादा को किया आलोकित

Report by Nawada News Xpress / नवादा / सूरज कुमार

नवादा जिले के मेसकौर प्रखंड स्थित पौराणिक सीतामढ़ी धाम में कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार तथा जिला प्रशासन, नवादा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “सीतामढ़ी मेला महोत्सव 2025” का शुभारंभ गरिमामय वातावरण में हुआ। उद्घाटन समारोह ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व से परिपूर्ण माता सीता की पावन स्थली में आयोजित किया गया, जहां श्रद्धा, संस्कृति और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला।

दीप प्रज्वलन के साथ आरंभ हुआ महोत्सव

मुख्य अतिथि नवादा डीएम रवि प्रकाश, जिला परिषद अध्यक्षा पुष्पा देवी, अपर समाहर्ता डॉ. अनिल कुमारी तिवारी, अनुमंडल पदाधिकारी रजौली स्वतंत्र कुमार सुमन तथा जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी प्रतिभा कुमारी समेत अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर मेला महोत्सव का उद्घाटन किया।

सीतामढ़ी: रामायण काल से जुड़ी दिव्य धरोहर

जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने संबोधन में बताया कि अगहन पूर्णिमा से आरंभ होने वाला पारंपरिक सीतामढ़ी मेला सदियों से सांस्कृतिक, धार्मिक और कृषि परंपराओं का प्रतीक रहा है। मान्यता के अनुसार, माता सीता ने द्वितीय वनवास के दौरान इसी गुफा में निवास किया, यहीं लव-कुश का जन्म हुआ और यही महर्षि वाल्मीकि की आश्रयस्थली भी रही। सीतामढ़ी गुफा की चिकनी, पॉलिशदार दीवारें प्रसिद्ध बराबर गुफाओं की स्थापत्य शैली से मेल खाती हैं, जो इसके प्राचीन वैभव को प्रमाणित करती हैं।

स्थानीय कला, शिल्प और कृषि परंपरा का उत्सव

मेला परिसर में पारंपरिक काष्ठ, पत्थर एवं मूर्ति कला के शिल्प बाजार ने दूर-दूर से आए कलाकारों और व्यापारियों को आकर्षित किया। यह मेला खरीफ फसल की कटाई के उपलक्ष्य में मनाया जाता है और किसानों की समृद्धि, लोकजीवन की परंपरा एवं ग्रामीण संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।

राष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ता सीतामढ़ी मेला

जिलाधिकारी ने बताया कि जिला कला संस्कृति कार्यालय द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर विभाग ने सीतामढ़ी मेले को राज्य स्तरीय मान्यता प्रदान करते हुए इसे सांस्कृतिक कैलेंडर 2025-26 में शामिल कर लिया है। उन्होंने आशा व्यक्त किया कि जैसे सोनपुर मेला को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है, वैसे ही आने वाले समय में सीतामढ़ी मेला भी राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर नवादा का मान बढ़ाएगा।

माता सीता के मंदिर में की गई पूजा-अर्चना

उद्घाटन के बाद जिला पदाधिकारी एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने प्राचीन माता सीता मंदिर में दर्शन कर प्रदेश और जिले की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। कार्यक्रम में रजौली विधायक विमल राजवंशी, हिसुआ नगर परिषद अध्यक्षा पूजा कुमारी, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, गोपनीय शाखा प्रभारी, स्थापना प्रभारी, जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी व अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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