दोस्त ही निकला कातिल, साक्ष्य छुपाने में भी दोषी करार, 9 दिन बाद कुएं से मिला था युवक का शव, अदालत ने सुनाया कड़ा फैसला
Report by Nawada News Xpress / नवादा / सूरज कुमार

दोस्ती के नाम पर भरोसा और फिर उसी भरोसे का खून—नवादा की अदालत ने 19 वर्षीय युवक गौतम कुमार की हत्या के मामले में बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। द्वितीय अपर न्यायाधीश उपेन्द्र कुमार की अदालत ने गया जिला के फतेहपुर नैडीहा निवासी कुंचन कुमार उर्फ कुंदन कुमार को हत्या, अपहरण और साक्ष्य छुपाने का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

मामला मेसकौर थाना क्षेत्र के तेतरिया गांव का है। मृतक की मां ललिता देवी द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार 19 सितंबर 2023 की सुबह उनका 19 वर्षीय पुत्र गौतम कुमार अपने ननिहाल में था। तभी उसका दोस्त कुंदन कुमार उसे बुलाकर मोटरसाइकिल से अपने साथ ले गया। इसके बाद गौतम घर नहीं लौटा।

परिवार की बेचैनी उस वक्त भयावह सच्चाई में बदल गई जब 28 सितंबर 2023 को गौतम का शव गांव के गणेश महतो के कुएं से बरामद किया गया। प्रथम दृष्टया अपहरण के बाद हत्या की आशंका जताई गई थी, जो जांच और गवाहों के बयानों से अदालत में साबित हुई।

अनुमंडल अभियोजन पदाधिकारी नवनीत कुमार ने अदालत में मजबूत पक्ष रखते हुए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अभियुक्त की संलिप्तता साबित की। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत सश्रम आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।

साथ ही धारा 364 के तहत भी सश्रम आजीवन कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड का आदेश दिया गया। साक्ष्य छिपाने के आरोप में 7 वर्ष का कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।

अदालत ने सभी सजाएं एक साथ चलने का आदेश दिया है। साथ ही अर्थदंड की राशि मृतक की मां को देने का निर्देश भी जारी किया गया। इस फैसले ने साफ संदेश दिया है कि जघन्य अपराध करने वालों को कानून किसी भी हाल में बख्शेगा नहीं।


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